जो रहीम उत्तम प्रकृति का अर्थ एवं व्याख्या

आज के इस लेख में रहीम का एक दोहा जो रहीम उत्तम प्रकृति …… का व्याख्या सहित विश्लेषण करेंगे तथा यह भी समझेंगे कि इस दोहे में विशेष क्या है। जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥ शब्दार्थ कुसंग का अर्थ है कुसंगति ( गलत संगति ) …

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